आज ख़ुशियों का मिरा मंज़र कहाँ है

घर में बैठा ढूँढ़ता हूँ घर कहाँ है

माँ की आँखों से भी डर जाते थे हम तो
आज कल बच्चों में ऐसा डर कहाँ है

यूँ अकेले आ गए हो जंग लड़ने
ये बताओ तुम सफ़-ए-लश्कर कहाँ है

हार आए हो लगा कर दाँव पर सब
पूछते हो माँ तिरा ज़ेवर कहाँ है

मैं सफ़र में मुद्दतों से हूँ अकेला
सोचता हूँ अब मिरा रहबर कहाँ है

ये नुमाइश तो मुबारकबाद तुम को
कोई बतलाए मिरा मगहर कहाँ है

आ गए हो दोस्तों तो आओ बैठो
और दिखलाओ ज़रा ख़ंजर कहाँ है

— AYUSH SONI

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