जो मेरे नाम से तज़ईन होगी
तो उस की ज़िन्दगी रँगीन होगी
अगर हम बोल दे लानत जो उस को
तो फिर लानत की ये तौहीन होगी
लगेगी क़ब्र हिन्दुस्तां से मेरी
तिरंगे की जो गर तक़्फीन होगी
यक़ीनन ईद होगी मेरी उस दिन
दुआ में जो तिरी आमीन होगी
जो मेरी याद आए रो ले देना
कहीं तब दर्द में तस्कीन होगी
— Irshad Siddique "Shibu"















