उठाना हो उठाना तुम अलम कोई
न तुम ख़ंजर उठाना और न बम कोई
मोहब्बत कीजे ताक़त है मोहब्बत में
यक़ीं कीजे नहीं नफ़रत में दम कोई
कि नाता आप से हम ऐसे तोड़ेंगे
कि जैसे तोड़ता है जज क़लम कोई
ये तन्हा रातें काटे दौरे है मौला
कि इस अहमक़ को भी दे दे सनम कोई
नहीं है जिस का कुछ भी उस
में ही हम है
है दुनिया जिस की उस
में नइँ है हम कोई
— Irshad Siddique "Shibu"















