मिरे मासूम दिल को तोड़ कर के
चला जायगा मुझ को छोड़ कर के
बिखर जाता हरिक टुकड़ा मुसलसल
हज़ारों बार देखा जोड़ कर के
लबों से चूम कर बटवे में अपने
तिरी तस्वीर रक्खी मोड़ कर के
— jaani Aggarwal taak
चला जायगा मुझ को छोड़ कर के
बिखर जाता हरिक टुकड़ा मुसलसल
हज़ारों बार देखा जोड़ कर के
लबों से चूम कर बटवे में अपने
तिरी तस्वीर रक्खी मोड़ कर के
Other ghazal from the same pen
Shers of dp.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling