
दो झुके नयनों ने जो दिनभर किया संवाद ले कर
मैं अयोध्या लौट आया लखनऊ से याद ले कर
तीन झुमका चार बोसा पाँच झप्पी आठ कंगन
रख दिया है पर्स में पूरा अमीनाबाद ले कर
— Jatin shukla
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