कैसा भी तूफ़ाँ हो तुम्हें तैयार होना चाहिए
तुम तो जवाँ हो तुम से दरिया पार होना चाहिए
ज़ालिम की हाँ हाँ कब तलक करते रहोगे दोस्तों
इस दौर में थोड़ा बहुत इनकार होना चाहिए
जब आसुओं ने रास्ता तय कर लिया है आँखों तक
फिर जल्दी से महबूब का दीदार होना चाहिए
जिस की वजह से मैं ज़ियादा ही परेशानी में हूँ
उस शख़्स का भी जीना अब दुशवार होना चाहिए
जो झूठ का चेहरा सभी के सामने ले आए शाज़
इस देश में इक ऐसा भी अख़बार होना चाहिए
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