बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछनातुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुतआवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहेबाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत— Aalok Shrivastav