चाँद तारे फ़लक पे चमकने लगे

यादों के चेहरे फिर से झलकने लगे

जब तिरी उँगलियों ने छुआ जिस्म को
मिट्टी के अंग सारे महकने लगे

धूप ने इस तरह से जलाया बदन
सारे मज़दूर सर को पटकने लगे

जब बड़ों की न मानी कभी कोई बात
बच्चे मंज़िल से अपनी भटकने लगे

जब सड़क पे निकल के वो आई परी
बूढ़ों के दिल भी धक धक धड़कने लगे

देख कर मलबे के नीचे मासूमों को
लोगों के आँसू टप टप टपकने लगे

— Meem Alif Shaz

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