हमदर्दी ज़िंदा है अभी भी गाँव मेंरहने नहीं देते हैं काँटा पाँव मेंकोई झुलसता है अगर इस धूप सेफ़ौरन ही ले जाते हैं उस को छाँव में— Meem Alif Shaz