मुझे तुम भी मोहब्बत से बुलाओ तो
अना का यह जो पत्थर है हटाओ तो
तुम्हारी अहलिया मैं भी हो सकती हूँ
मिरा दिल तुम नज़ाकत से चुराओ तो
सितारों की तरह जब जगमगाना है
चराग़ों की तरह ख़ुद को जलाओ तो
ज़माना पूछता है झूठ वालों को
ज़माने को ज़रा सच भी सिखाओ तो
हमेशा ख़ूब खाते हो अकेले ही
गरीबों को भी कुछ दिल से खिलाओ तो
ख़बर जो भी छपेगी झूठ ही होगी
हक़ीक़त के लिए ख़ुद को चलाओ तो
अँधेरा भी हमेशा हार जाएगा
कभी दिल का दिया तुम भी जलाओ तो
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