"ऐश ट्रे"

एक आग ज़माने में लगी हुई है
और एक ज़माने भर के लोगों में
और एक लगी हुई है इस सिगरेट में
जो मेरी उँगलियों के बीच में फँसी हुई है

जलने और सुलगने में बहुत फ़र्क़ है
ये फ़र्क़ आप को समझ आएगा
जब आप किसी जलती हुई
लाश के सामने बैठ कर
कुछ कश लगाएँगे

मेरी सिगरेट सुलग सुलग कर
झड़ने के लिए ऐश ट्रे की तरफ़ भागती है
इंसान कहाँ भागता है
नहीं भाग पाता ना
ता'उम्र जलकर
झड़ने के वक़्त
चार कंधों पर ले जाया जाता है
और फूँक दिया जाता है
बड़ी आसानी से
जैसे मैं ये सिगरेट फूँक रहा हूँ
तब्दील हो जाता है
राख में
मिट्टी में
मेरी जलती हुई सिगरेट की तरह

हम सब भी क़तार में हैं
जैसे क़तार में लगी हुई हैं
सिगरेटें
डिब्बी में
जलकर
किसी के होंठों में लग कर
सुलगने को बेताब
राख होने को बेताब
दफ़्न होने को बेताब
सिगरेटें
हम सिगरेट ही तो हैं
और ये दुनिया
एक ऐश ट्रे

— Saurabh Yadav Kaalikhh

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