सब सीमित है

यहाँ कोई रिक्त नहीं है
सिवाए लाल कोई रक्त नहीं है
किसी के पास है थोड़ा ज़्यादा
तो कोई बिस्तर पर पड़े सोचता कि
वक़्त कम है या वक़्त ही नहीं है

सब सीमित है
सीमित ज़मीं है सीमित है ये खुला आसमान
सीमित इस आसमान तले रह रहे हम इंसान
सीमित है आप का मकान भी
सीमित आप की मौत का सामान भी

सीमित है धड़कन की रफ़्तार भी
ये दहर भी ये दयार भी
सीमित हैं यहाँ यार भी
यारों की बातें मुलाक़ातें
दिन का वक़्त हो या ये रातें

सीमित हैं ग़म यहाँ
ग़म के बा'द की ख़ुशी
सीमित सी है रस्सी
और उस
में पड़ने वाली गाँठ
लोगों के अपने नवाबी ठाठ

सीमित रिश्ते हैं
नहीं दिखते फ़रिश्ते हैं
सीमित आप के घर गाड़ी
मोबाइल की किश्तें हैं
जिन्हें भरने के लिए
आप अपने सीमित जीवन में
सीमित कमाई के लिए
सीमित संख्या में काम करते हैं

सीमित है आप का वक़्त भी
सीमित हैं ज़िंदगी के पड़ाव
हर पड़ाव के दरख़्त भी

सीमित है आप की जवानी जिस्म में रवानी
ये सारी हवा ये पानी हमारी तुम्हारी वाणी

सूरज का उगना डूबना सीमित है
डूबता सूरज देख समझ आया
उजाला सीमित है
और उगता सूरज देख समझ आया
कि अँधेरे से सीमित रिश्ता ही
स्थिरता की राह है
स्थिरता सीमित है
सीमित है राह भी
ख़ुद की परवाह भी

सीमित उम्र है
निश्चित मृत्यु है
सीमित है आप की काठी
सीमित है लकड़ी लाठी
सीमित है आप के ताबूत का वज़न
सीमित है आप के ऊपर पहनाया गया कफ़न
आप के लिए तय हुई दो गज़ भर ज़मीन
आप के नीचे बिछी आख़िरी कालीन
सीमित है

सीमित शब्दों से जितना लिख पाए लिखते गए
मुँह उठा कर कहीं से कालिख़ आए पढ़ते गए
जितना पढ़ पाए
क्योंकि वक़्त बेहद सीमित था
सीमित है सीमित रहेगा

— Saurabh Yadav Kaalikhh

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