उस के इश्क़ में जितनी बंदिश होती थी

मेरे मन में फिर बस रंजिश होती थी

उस के गाँव में हल्के बादल आते थे
मेरे गांव में भारी बारिश होती थी

मुझ को ये लगता था मेरी क़िस्मत है
उस की सोची समझी साज़िश होती थी

मिलने में वो आनाकानी करती थी
जब जब मिलने की गुंजाइश होती थी

आँखों से भर भर कर पानी गिरता था
और उसे लगता था बारिश होती थी

और कभी कुछ माँगा हो तो बतलाओ
ख़ुशियाँ उस की मेरी ख़्वाहिश होती थी

ख़्वाहिश इक ऐसी भी थी जिस से मेरे
जीवन में ग़म की पैदाइश होती थी

उस के जिस्म को कोई जब छू लेता था
मेरे पूरे बदन में ख़ारिश होती थी

— Aashish kargeti 'Kash'

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Udasi Shayari

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