मुझ को दिलबर दिन-भर सुन
कुछ अच्छी बातें कर सुन
हर धड़कन पर नाम तिरा
सीने पर सर रख कर सुन
फट से हो जा मेरी अब
ग़ौर से मेरा मंतर सुन
जो बाहर है रहने दे
जो तेरे है भीतर सुन
दूर के ढोल लगे अच्छे
पास से इनको आ कर सुन
क्या आऊँगा दिन में याद
जाना है कल दफ़्तर सुन
दिल तो सारे झूठे है
क्या कहता ये पत्थर सुन
तेरे चक्कर में 'आशीष'
सालों भटका दर दर सुन
— Aashish kargeti 'Kash'















