ख़ामोश हूँ लबों पर शिकवा गिला नहीं है
इसका ये तो नहीं मतलब कुछ हुआ नहीं है
जंजीर कर रखे हैं बार-ए-गराँ ने लब भी
इस ज़ेहन में वगरना कहने को क्या नहीं है
बदबख़्त बद-ज़बाँ बद-किरदार मैं तो हूँ ही
पर दोस्त बात ये है तू भी ख़ुदा नहीं है
इस बात पर उसे मैंने हम सफ़र बनाया
आगे का रास्ता उसको भी पता नहीं है
ता-उम्र साथ चलता है बन के बार-ए-सर ये
ये 'इश्क़ बस घड़ी भर का मो'जिज़ा नहीं है
हमको भी ख़ौफ़-ए-दोज़ख़ ने बंदगी सिखा दी
हम भी ये सोचते थे पहले ख़ुदा नहीं है
किरदार रो रहे हैं इस रंग-मंच में सब
कोई दरख़्त इस जंगल में हरा नहीं है
मैं आख़िरी दिया हूँ तूफ़ान के मुक़ाबिल
मुझ
में भी और अब ज़्यादा हौसला नहीं है
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