शिकवा-गिला किसी से भी, कितना करेंगे हम
हर बार ज़िंदगी ये, तमाशा करेंगे हम
हमको पता है उनको तो मिलना नहीं है अब
फिर भी मिलन का उन सेे इरादा करेंगे हम
इस रात चाँदनी भी बहुत तेज़-तेज़ है
इस रात उनको याद भी ज़्यादा करेंगे हम
दिल को सुकून आए तो फिर जाओ छोड़कर
कुछ इस तरह का अबकी तक़ाज़ा करेंगे हम
तस्वीर उसकी आज भी कमरे में है रखी
इक दिन उसी से ऊब के झगड़ा करेंगे हम
सच बोलने की हमने भी क़ीमत चुकाई है
अब झूट बोल ख़ुद को तो सच्चा करेंगे हम
जब आशिक़ी के खेल में सब हार जाए, तो
फिर लौटने का ख़ुद ही इरादा करेंगे हम
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