
इश्क़ में हो तो दवा भी बे-असर है
इश्क़ में तो लोग होते बे-बसर है
जानते ही तो नहीं कैसी बला है
इस लिए अंजाम से वे बे-ख़बर है
छूट जाए साथ तो सूना सा घर है
साथ होते थे, रहे तब बे-क़दर है
— Kohar
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