मोहब्बत मैं जताना चाहता हूँ
यही रिश्ता निभाना चाहता हूँ
ये साँसें भी बड़ा दुख दे रही हैं
कि अब तो मर ही जाना चाहता हूँ
बहुत यारी कमाई मैं ने पर अब
मैं बस पैसा कमाना चाहता हूँ
मेरी इक ही तमन्ना है कि मैं अब
तेरे ख़्वाबों में आना चाहता हूँ
मुझे हँसते हुए देखा है तुम ने
मैं अब ग़ुस्सा दिखाना चाहता हूँ
तेरी बिखरी हुई यादों से अब मैं
नई ग़ज़लें बनाना चाहता हूँ
— Krishan Kant Saini















