कहेंगे सब यही आ कर तुम्हारे काम आएँगे

खड़े होंगे अकेले जब कभी इल्ज़ाम आएँगे

लगा है श्राप गौतम का अहिल्या हो गए लड़के
न जाने कब इन्हें अब थामने श्री राम आएँगे

उगा कर पेड़ दुख के दर्द के गर ये घटा छाई
तो बरसेगी ज़मीं इस पर अगर आलाम आएँगे

तेरे जाने से मन्दिर के किए हैं बंद दरवाज़े
नहीं हैं राधिका फिर क्यूँ यहाँ पर श्याम आएँगे

दग़ा करना हुनर है अब समझलो 'दिव्य' इतना तुम
वफ़ा कर के यहाँ बदले में बस औहाम आएँगे

— Divya 'Kumar Sahab'

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Ilm Shayari

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