patthar chale to ghaav shajar ne pahan li.e | पत्थर चले तो घाव शजर ने पहन लिए

  - Divya 'Kumar Sahab'

पत्थर चले तो घाव शजर ने पहन लिए
पत्ते तभी से नीम ने कड़वे पहन लिए

तैयार था ये रास्ता ठोकर लिए हुए
मैनें भी दोनों पैर में काँटे पहन लिए

अपनों को आज़माया तो मुझको पता चला
सब दुश्मनों ने ही यहाँ रिश्ते पहन लिए

सबने उतार कर दिया अपना बदन इसे
अब तक न जाने आग ने कितने पहन लिए

ये खेल है याँ ख़्वाब याँ किरदार है कोई
किसके लिए ये रूह ने कपड़े पहन लिए

देखी किसी ने थी किसी ने साथ ज़िंदगी
पर और किसी ने आँख के सपने पहन लिए

कितने तो आए और गए मुझ सेे कहा गया
अब तो बता दो आपने कितने पहन लिए

मैंने तो उस सेे कह दिया रह लूँगा बिन तेरे
पत्थर ने तैरने के इरादे पहन लिए

  - Divya 'Kumar Sahab'

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