तड़प कर दिल नज़र तक आ गया फिर फाँद निकला है
जला है आसमाँ जब धूप से तब आँद निकला है
ज़मीं पर आज सूरज है सुनहरे झुमके कहते हैं
बिखरती ज़ुल्फ़ कहती है ज़मीं पर चाँद निकला है
कमाया हक़ किसी का मार कर और चाहिए बरकत
हुई है जाँच तो फिर पेट इनका नाँद निकला है
— Divya 'Kumar Sahab'















