लोग ऐसे भी दिल जलाते हैं
दर्द देकर के मुस्कुराते हैं
इक मुअम्मा है ये अदा उन की
क्यूँ गले से मुझे लगाते हैं
मैं ने पाया सिला वफ़ाओं का
बे-वफ़ा कहके वो बुलाते हैं
साथ चलने का अहद-ओ-पैमाँ था
अब क़दम पीछे क्यूँ हटाते हैं
बे-वफ़ा मुझ को कह रहे हैं वो
साथ किस के वफ़ा निभाते हैं
तुझ को ख़ुशियाँ सभी मुबारक हो
तेरी महफ़िल से हम तो जाते हैं
नाम ले कर हमें पुकारो मत
हम तो बस अपना दिल दुखाते हैं
— Kumar Aryan















