और कुछ राद सुना वहशत में
बन गया दर्द क़ज़ा वहशत में
सब जुनूँ बूद सक़ाफ़त तक ही
कुछ नहीं नाज़ वफ़ा वहशत में
ना-रसा आब लबों का तेरे
बे-मज़ा रात किता वहशत में
आरज़ू बाब मिरे पैरामन
बारहा यार फ़ना वहशत में
पेशतर राह बना क़ातिल तक
और फिर वार हुआ वहशत में
— Kunu















