बन गई आबरू वफ़ा कामिलकुछ नहीं हो सका ख़ुदा कामिलइल्तिजा थी किताब-रू दुनियापर मिली बेमज़ा बला कामिलऔर भी है यहाँ सुखन ज़िंदामत कहो दरमियाँ दवा कामिलपेशतर हम-ज़बाँ हुई वहशतफिर खिली नस्तरन नुमा कामिलनीम-जाँ तक छुटा नहीं दामनवो रही गुल-बदन क़ज़ा कामिल— Kunu