मरता गया ईमान बसज़िन्दा रहा इंसान बसमुझ तक दवा भी दर्द हैहूँ नाज़ से शमशान बसअब तो समझ लो आबरूख़ुद से हो सब अनजान बसनफ़रत नहीं रू होगा गरपढ़ आए हो इम्कान बसमुझ तक नहीं आ सकते सबग़म का हूँ इक मीज़ान बस— Kunu