मरता गया ईमान बस
ज़िन्दा रहा इंसान बस
मुझ तक दवा भी दर्द है
हूँ नाज़ से शमशान बस
अब तो समझ लो आबरू
ख़ुद से हो सब अनजान बस
नफ़रत नहीं रू होगा गर
पढ़ आए हो इम्कान बस
मुझ तक नहीं आ सकते सब
ग़म का हूँ इक मीज़ान बस
— Kunu
ज़िन्दा रहा इंसान बस
मुझ तक दवा भी दर्द है
हूँ नाज़ से शमशान बस
अब तो समझ लो आबरू
ख़ुद से हो सब अनजान बस
नफ़रत नहीं रू होगा गर
पढ़ आए हो इम्कान बस
मुझ तक नहीं आ सकते सब
ग़म का हूँ इक मीज़ान बस
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