कहाँ हम सुखन का क़मर जानते हैं
मगर इस इरम का असर जानते हैं
हुआ इक कहानी तमाशा क़ज़ा जब
ख़फ़ा सब गुलिस्ताँ ख़बर जानते हैं
जहाँ भी अदा बारहा इल्तिजा तो
वफ़ा से अमाँ की नजर जानते हैं
नहीं है जुनूँ दरमियाँ हम-ज़बाँ जब
बयाबाँ बयाबाँ बसर जानते हैं
हुआ है मुक़र्रर रवानी कुनू सब
भला अब इसी में जिगर जानते हैं
— Kunu















