बदन ख़ार से तो शराबोर देखा

  - Lalit Mohan Joshi

बदन ख़ार से तो शराबोर देखा
मुक़द्दर मगर उन का कमज़ोर देखा

बचाते नहीं मरने वालों को भी जो
उन्हीं को तो हमने कफ़नचोर देखा

मुझे डर नहीं अब किसी से यहाँ पर
मेरे राम ने जब मेरी ओर देखा

चले राम का नाम ले कर यहाँ जो
अँधेरे को छटते ही हर ओर देखा

रटा नाम राधा ही राधा यहाँ जो
मुक़द्दर को बनते ही पुरज़ोर देखा

कली काल हो या कोई युग यहाँ पर
फ़क़त एक कान्हा को चितचोर देखा

'ललित' काट दो अब्र घनघोर को अब
तुम्हीं को ज़माने ने शहज़ोर देखा

  - Lalit Mohan Joshi

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