हम को दुनिया के आज़माने से पहले

हम को रुकना है इस नज़ारे से पहले

याद मेरी तुम को बहुत आएगी फिर
तुम को बोला था मैं ने जाने से पहले

जिस को चाहूँ वो रूह में ज़हर रक्खे
काश वो कह देता पिलाने से पहले

मैं ने तुम को जिस नज़्म में सब कहा था
जा रहे हो तुम उस को सुनने से पहले

मैं लुटा हूँ कितना मोहब्बत के रस्ते
काश कोई समझे भुलाने से पहले

वो ग़ज़ल में कहता रहा दर्द अपना
डर रहा हूँ महफ़िल बुलाने से पहले

ज़िन्दगी सब को है सिखाती यहाँ पर
पढ़ लें ख़ुद भी थोड़ा सिखाने से पहले

जब न मिलने की कोई उम्मीद बाक़ी
फ़ैसला कर दो अब कि जाने से पहले

तुम मुहब्बत को कोई हो खेल समझे
टूटना पड़ता है निभाने से पहले

मैं खड़ा हूँ ग़म के समुंदर किनारे
देखना है मुझ को डुबाने से पहले

हम सभी को इक रोज़ मिटना है यारो
क्यूँ न सच बोले यार मिटने से पहले

ज़ख़्म भी अब तो सब हमारे हमें ही
कुछ सिखाते हैं चोट खाने से पहले

काम होने का अपना इक वक़्त है तय
सो नहीं होगा वक़्त आने से पहले

हम फ़रिश्ता जिस को यहाँ मानते थे
चल दिया वो रस्ता दिखाने से पहले

घर किराए का और ख़र्चा दवा पर
फिर उधारी सर है महीने से पहले

फ़ोन पर ही पूछा गया हाल उस का
बुझ गया चेहरा एक खिलने से पहले

पहले शाइ'र ने इक ग़ज़ल को जिया फिर
अब भटकता है वो सुनाने से पहले

मीठे जुमलों में हैं छुपी साज़िशें सौ
सोच लेते हैं हम ये हँसने से पहले

इक घड़ी मैं ने सोच कर ये ख़रीदी
जो बता देगी ग़म को आने से पहले

इक दवा मुझ को चाहिए ज़ख़्म ख़ातिर
ज़ख़्म भी भरना है वो बढ़ने से पहले

दिल को पहले तो जिस्म को बा'द मारा
बस बदन को ढोया यूँ मरने से पहले

ये सुख़न-वर बे-दर्द इक मौत पाए
ये दुआ कर दो यार जाने से पहले

जब से दफ़्तर में चेहरों के खोल देखे
सब ललित से जलते हैं हँसने से पहले

— Lalit Mohan Joshi

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