हो नहीं जब वो वफ़ादार हमारा क्या है
हम तो हैं एक क़लमकार हमारा क्या है
साथ तुम को तो ज़माने का मिला होगा फिर
हम तो सय्याद हैं सरकार हमारा क्या है
गाँव जाना नहीं होता है हमारा अब तो
ग़म के साए में है त्योहार हमारा क्या है
उन की महफ़िल में हमें कौन बुलाएगा दोस्त
जब अधूरे से हो अश'आर हमारा क्या है
अब हमें कोई भी उम्मीद नहीं दुनिया से
राम जब से हुए आधार हमारा क्या है
— Lalit Mohan Joshi















