कुछ दुश्मन हैं साथ हमारे
भोले भाले प्यारे प्यारे
तुम ने दे दी उतनी चादर
हम ने जितने पैर पसारे
इस से अच्छा इश्क़ ही करते
दर दर फिरते मारे मारे
चीख़ रहे थे भूखे बच्चे
माँ ने अपने अश्क बघारे
कोई मुझ को क्या लूटेगा
खोल चुका हूँ ताले सारे
उस ने ऐसा खेल रचाया
जितने भी थे माहिर हारे
— Vijay Anand Mahir















