जो सच है वो छिपाया जा रहा हैहमें उल्लू बनाया जा रहा हैकिसी की बात मानी जा रही हैकिसी का घर गिराया जा रहा हैकरें हम सब्र कब तक ओ ख़ुदायाकि अब तो क़हर ढाया जा रहा हैहाँ बस कुछ देर में तदफ़ीन होगीअभी मुर्दा नहाएा जा रहा है— Marghoob Inaam Majidi