सच बताऊँ मुझे भी हैरत हैवाकई तुम को मुझ से रग़बत हैपहले हर रोज़ बात होती थीयाद ही कर ले अब ग़नीमत हैबात करने लगा है औरों कीबात करना भी अब मुसीबत हैवैसे में ठीक ठाक हूँ जानीबस ज़रा बे-दिली की हालत है— Marghoob Inaam Majidi