इक दफा़ तुम मिलो तो बताएँ तुम्हेंप्यार कितना हमें ये दिखाएँ तुम्हेंहम ग़ज़ल लिख रहे हैं तुम्हारे लिएतुम सुनो गर सनम तो सुनाएँ तुम्हें— Jaypratap chauhan