ha | हमें दिल को लगाना चाहिए था

  - Manish Yadav

हमें दिल को लगाना चाहिए था
इसे भी आज़माना चाहिए था

अकेले का नहीं था देख ज़िम्मा
तुझे भी पास आना चाहिए था


सबब होता नहीं है शाद का यूँँ

हमें कोई बहाना चाहिए था
हुई क्या थी ख़ता मेरी तरफ़ से

हक़ीक़त को बताना चाहिए था
ख़ुशी के क़त्ल के बाबत उदासी

तुझे भी जेल जाना चाहिए था
बहक जाते मगर हम भी यहाँ पर

ज़रा मौसम सुहाना चाहिए था
किताबों की तहों के बीच सूखे

गुलाबों को दिखाना चाहिए था
किनारे बैठकर अब सोचना क्या

हमें तो डूब जाना चाहिए था

  - Manish Yadav

Tasawwur Shayari

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