दिल किसी से लगा ही नहींक्यूँ अभी तक पता ही नहींमुझ पे हक़ तू जता ही नहींपास जब तू रहा ही नहींलोग कर लेते हैं इश्क़ परये मुझे तो हुआ ही नहींमार दे तू चलेगा मुझेहिज्र से तो सता ही नहींमिल रही है सज़ा पर ख़ताक्या हुई ये पता ही नहीं— Manoj Devdutt