gham sabhi apne gawara karke | ग़म सभी अपने गवारा करके

  - Manoj Devdutt

ग़म सभी अपने गवारा करके
ख़ुश थे हम तुझको सितारा करके

देखती थी वो मुझे पर मैं ही
तो बुलाता था इशारा करके

पूछता है वो हमारी मर्ज़ी
क़त्ल पर पहले हमारा करके
'इश्क़ अब इक बार कब होता है
देखना तुम भी दुबारा करके

साथ ख़ुद के ख़ुश नहीं था इतना
जितना हूॅं ख़ुद को तुम्हारा करके

तुम बनो मेरा सहारा तो मैं
ख़ुद को रखता बे-सहारा करके

है ख़बर होगा नहीं तेरे बिन
फिर भी देखेंगे गुजारा करके

लौट आऊँगा जहन्नुम से मैं
तुम बुलाना बस तुम्हारा करके

दस्तरस में है तेरे अब ये देव
मस्त रह ग़म से किनारा करके

  - Manoj Devdutt

Nigaah Shayari

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