ग़म सभी अपने गवारा करके
ख़ुश थे हम तुझको सितारा करके
देखती थी वो मुझे पर मैं ही
तो बुलाता था इशारा करके
पूछता है वो हमारी मर्ज़ी
क़त्ल पर पहले हमारा करके
'इश्क़ अब इक बार कब होता है
देखना तुम भी दुबारा करके
साथ ख़ुद के ख़ुश नहीं था इतना
जितना हूॅं ख़ुद को तुम्हारा करके
तुम बनो मेरा सहारा तो मैं
ख़ुद को रखता बे-सहारा करके
है ख़बर होगा नहीं तेरे बिन
फिर भी देखेंगे गुजारा करके
लौट आऊँगा जहन्नुम से मैं
तुम बुलाना बस तुम्हारा करके
दस्तरस में है तेरे अब ये देव
मस्त रह ग़म से किनारा करके
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