nafrat na kar tu pyaar se maazi ko bhool ja | नफरत न कर तू प्यार से माज़ी को भूल जा

  - Amaan mirza

नफरत न कर तू प्यार से माज़ी को भूल जा
किरदार याद रख तू कहानी को भूल जा

मैंने जो कुछ कहा है उसे ज़ेहन में उतार
लफ़्ज़ों पे ध्यान दे तू मआनी को भूल जा

मरने के बाद चलना तो है पुल सिरात पर
ये भी तो इम्तिहान है खाई को भूल जा

नाराज़ हो गई है तो जाकर उसे मना
भाई से क्या ग़रज़ तुझे भाई को भूल जा

मेरे अलावा और भी मिर्ज़ा हुए बहुत
जो याद थे वो याद हैं बाक़ी को भूल जा

  - Amaan mirza

Yaad Shayari

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