मैं इस सेे ज़ियादा बुरा क्या लिखूँगा
अगर तुम पढ़ोगी तो अच्छा लिखूँगा
मिरे शे'र जो ज़ेहन तक सबके पहुँचे
न आसाँ लिखूँगा न गहरा लिखूँगा
तू कम अक़्ल है ना समझ और कमज़ोर
तेरी सोच से थोड़ा हल्का लिखूँगा
जो बैठा है कुर्सी पे सुनता नहीं है
लिहाज़ा मैं बहरे को बहरा लिखूँगा
तेरे बाद जो याद रह जाए मिर्ज़ा
क़सम से मैं इक शे'र सच्चा लिखूँगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Amaan mirza
our suggestion based on Amaan mirza
As you were reading Yaad Shayari Shayari