नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं कियाकइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं कियातुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तेंसुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया— Amaan mirza