अब वो पहली सी शिद्दत नहीं हैइश्क़ में वो तमाज़त नहीं हैयूँ लगे जैसे दम घुट रहा होसाँस लेने की फ़ुर्सत नहीं हैजब तलक साथ थे सब हसीं थाअब वो मंज़र वो रंगत नहीं हैएक आदत बनी है ये दुनियाजीने की अब ज़रूरत नहीं हैदास्ताँ 'मीम' की जो सुनी हैवो मोहब्बत मोहब्बत नहीं है— Meem Mohammed