हाँ मेरे साथ कई नफ़्सियाती मसअले हैंतमाम ज़हनी मसाइल से जूझता हूँ मैंये ज़ेहन मेरा न मुझ को कहीं निगल बैठेमुझे बचाओ रफ़ीक़ो कि डूबता हूँ मैं— Mohit Subran