जब वो अचानक सामने आ कर बैठ गए
मिसरा क्या हम होश भुला कर बैठ गए
कितनों के दिल टूट गए सोचो तो सही
आप तो आए मुँह को फुला कर बैठ गए
कुछ सिक्के घर भेज के यूँ इतराते हैं
जैसे तो सब क़र्ज़ चुका कर बैठ गए
अब हारें हम या जीतें उस की मर्ज़ी
हम तो ख़ुद पे दाँव लगा कर बैठ गए
दुनिया मेरी बर्बाद हुई पर आप को क्या
आप तो बस जन्नत में जा कर बैठ गए
— Mukesh Guniwal "MAhir"















