"नज़्म-ए-ज़िन्दगी"
ज़िन्दगी हबाब है
ज़िन्दगी तो ख़्वाब है
ज़िन्दगी क़िताब है
ज़िन्दगी हिसाब है
ज़िन्दगी शराब भी
ज़िन्दगी रबाब है ।
ज़िन्दगी सवाल भी
और कभी जवाब है
साँस पर तनी हुई
ज़िन्दगी तनाब है
बेबसी ही बेबसी
ज़िन्दगी अज़ाब है
हाँ मगर कभी कभी
ज़िन्दगी रुबाब है
ज़िन्दगी गुलाब है
ज़िन्दगी इताब है
अस्ल में ये ज़िन्दगी
बंद कोई बाब है
— Navneet krishna















