दुश्मनी करता नहीं था दोस्ती होती न थी
जब तलक जलता नहीं था रौशनी होती न थी
बस इसी के वास्ते आशिक़ बना हूँ दोस्तों
आशिक़ी करता नहीं था शायरी होती न थी
बस मोहब्बत का यही था हाल उसके सामने
वो कभी करता न था मुझ सेे कभी होती न थी
सिर्फ़ तेरे ग़म ने इस सहरा में पानी ला दिया
वरना मेरी आँख ये गीली कभी होती ना थी
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