धोखाधड़ी अजीब किए जा रहा बशरलाखों की बददुआएँ लिए जा रहा बशरदौलत की चाह ऐसी कि गिरवी रखा ज़मीरईमाँ को बेच कर भी जिए जा रहा बशर— Nityanand Vajpayee