तुम्हारे बस में जो भी था वो तुम ने कर दिया अबहमारे रस में विष भरना था तुम ने भर दिया अबकभी बाज़ी हमारे हाथ आएगी तो बचनाकि हम ने भी उसी विष में डुबो नश्तर दिया अब— Nityanand Vajpayee