गर सियासत में मिरा भी एक पद होता
लोभियों की सफ़ में सब से आला क़द होता
इश्क़ वालों में अगर होते इलेक्शन तो
मैं मोहब्बत की सभा का सांसद होता
मेरे दिल में तेरा होना ख़ुश-गुमानी है
तेरे दिल में मेरा होना मुस्तनद होता
बस 'मिलन' थोड़ी सी देता अहमियत मुझ को
क़ातिल-ए-बातिन निगार-ए-मोतमद होता
— Milan Gautam















