मोहब्बत के तारीक मोड़ आई हो तुम
किसी और से रिश्ता जोड़ आई हो तुम
तुम्हें इश्क़ में कामयाबी मिली है
मुबारक हो दिल मेरा तोड़ आई हो तुम
मिरे इश्क़ से ही मुनव्वर हुई थी
मुझे ही अँधेरों में छोड़ आई हो तुम
तुम्हें जिस कलाई ने साहस दिया था
उसी इक कलाई को मोड़ आई हो तुम
ये पैच-अप से ब्रेक-अप के इस दौर-ए-नौ में
मोहब्बत बहुत पीछे छोड़ आई हो तुम
मिरे होंठों को अपने होंठों से छू कर
बयाबान से दरिया जोड़ आई हो तुम
तुम्हें आफ़्ताबी तमाज़त मुबारक
क़मर की ख़ुनुक छाँव छोड़ आई हो तुम
तुम्हारे हुनर की मिसालें मैं क्या दूँ
'मिलन' जैसे का दिल भी तोड़ आई हो तुम
— Milan Gautam















