मुसलसल फ़िक्र करना फ़ज़्ल करना लाड-प्यार ऐसे
बताओ कौन करता है दिलों की लूट-मार ऐसे
अगर वो बे-वफ़ा भी है तो भी रब ख़ुश रखे उस को
मैं आख़िर क्या करूँ जब हैं ही उस के संस्कार ऐसे
अगर हम पूजते हैं तो ही होती है दुआ मक़बूल
भला करता है नफ़्सा-नफ़्सी क्या परवरदिगार ऐसे
मैं उस की बे-वफ़ाई की मुआफ़ी दे भी देता गर
झुकाती नज़रें अपनी और होती शर्मसार ऐसे
कभी राधा कभी मीरा नज़र आती मुझे उस
में
मुझे मोहन बनाती है वो लड़की बार-बार ऐसे
'मिलन' वाहिद वो लड़का है जिसे है इश्क़-ए-रूहानी
वगर्ना कौन करता है सितमगर तुझ से प्यार ऐसे
— Milan Gautam















