हादसा ख़ैर कोई हुआ भी नहींवो गया और दिल से गया भी नहींआशिक़ी ने दिए तोहफ़े में मुझेज़ख़्म ऐसे कि जिन की दवा भी नहींचाँद इक रोज़ ऐसे गया रूठ करइस गली में कभी फिर दिखा भी नहींमैं उसे क्या कहूँ तुम बताओ कि वोछोड़कर भी गया बे-वफ़ा भी नहीं— Prashant Prakhar